
सर्वं परवशं दुःखं सर्वात्मवशं सुखम् ।
वदन्तीति समासेन लक्षणं सुख-दुःखयोः ॥468॥
अन्वयार्थ : परवशं सर्वं दु:खं ,आत्मवशं सर्वं सुखं ; इति सुख-दु:खयो: लक्षणं समासेन वदन्ति ।
'जो-जो पराधीन है वह सब दुःख है और जो-जो स्वाधीन है वह सब सुख है' इसप्रकार संक्षेप से सुख-दुःख का लक्षण कहते हैं ।