ननु चैकं सदिति यथा तथा च परिणाम एव तद् द्वैतम्‌ ।
वक्तुं क्षममन्यतरं क्रमतो हि समं न तदिति कुतः ॥341॥
अन्वयार्थ : जिस प्रकार सत्‌ एक है उसी प्रकार परिणाम भी एक है या दो है? फिर क्या कारण है कि इन दोनों में से किसी एक का क्रम से ही कथन किया जा सकता है दोनों का एक साथ नहीं ?