
अथ किं कखादिवर्णाः सन्ति यथा युगवदेव तुल्यतया ।
वक्ष्यन्ते क्रमतस्ते क्रमवर्तित्वाद्-ध्वनेरिति न्यायात् ॥342॥
अन्वयार्थ : तो क्या ऐसा है कि जिस प्रकार क, ख, आदि वर्ण एक साथ समानरूप से विद्यमान रहते हैं, परन्तु ध्वनि में क्रमवर्तीपना पाया जाने से वे बोले क्रम से जाते हैं, उसी प्रकार सत् और परिणाम एक साथ विद्यमान रहते हुए क्या क्रम से कहे जाते हैं ?