+ क्या बीजांकुर के समान हैं? -
अथ किं बीजांकुरवत्कारणकार्यद्वयं यथास्ति तथा ।
स यथा योनीभूतं ततत्त्रैकं योनिजं तदन्यतरम्‌ ॥351॥
अन्वयार्थ : अथवा जिस प्रकार बीज और अंकुर में कारण-कार्यभाव है उसी प्रकार सत् और परिणाम में भी क्या कारण-कार्यभाव है ? जैसे कि बीज और अंकुर में एक कारण है ओर दूसरा कार्य है ?