
तत्र मिथस्सापेक्षधर्मद्वयदेशिन: प्रमाणस्य ।
मा भूदभाव इति न हि दृष्टान्तो वर्णपंक्तिरित्यत्र ॥360॥
अन्वयार्थ : परस्पर में साक्षप सत् और परिणाम इन दोनों धर्मों को विषय करनेवाले प्रमाण का अभाव करना इष्ट नहीं इसलिए प्रकृत में जो वर्णपंक्ति का दृष्टान्त दिया है वह ठीक नहीं है ।