+ प्रमाणाभाव के अभाव में नय भी नहीं ठहरता -
अपि च प्रमाणाभावे न हि नयपक्षः क्षमः स्वरक्षायै ।
वाक्यविवक्षाभावे पदपक्ष: कारकोपि नार्थकृते ॥361॥
अन्वयार्थ : यदा कदाचित्‌ प्रमाण का अभाव भी मान लिया जाय तो भी काम नहीं चल सकता, क्योंकि जिस प्रकार वाक्य विवक्षा के अभाव में केवल पद पक्ष किसी प्रयोजन की सिद्धि में समर्थ नहीं है, उसी प्रकार प्रमाण के अभाव में केवल नयपक्ष भी अपनी रक्षा में समर्थ नहीं हैं ।