+ कारकद्वय भी दृष्टान्ताभास है -
नार्थक्रियासमर्थो दृष्टान्त: कारकादिवद्धि यतः ।
सव्यभिचारित्वादिह सपक्षवृत्तिविपक्षवृत्तिश्च ॥383॥
वृक्षे शाखा हि यथा स्यादकात्मनि तथैव नानात्वे ।
स्थान्यां दधीतिहेतोर्व्यभिचारी कारकः कथं न स्यात्‌ ॥384॥
अपि सव्यभिचारित्वे यथाकथन्चित्सपक्षदक्षश्चेत्‌ ।
न यतः परपक्षरिपुर्यथा तथारिः स्वयं स्वपक्षस्य ॥384॥
साध्यं देशांशाद्वा सत्परिणामद्वयस्य सांशत्वम् ।
तत्स्वाम्येकविलोपे कस्यांशा अंशमात्रएवांशः ॥386॥
अन्वयार्थ : आधार आधेय न्याय से जो दो कारकों का दृष्टांत दिया गया है वह भी ठीक नहीं है, वह व्यभिचारी है क्योंकि वह सपक्ष विपक्ष दोनों में ही रहता है । साध्य के अनुकूल दृष्टान्त को सपक्ष कहते हैं और उसके प्रतिकूल दृष्टान्त को विपक्ष कहते हैं । जो दृष्टान्त साध्य का सपक्ष भी हो तथा विपक्ष भी हो वह व्यभिचार दोष विशिष्ट दृष्टान्त कहलाता है । सत् परिणाम के विषय में दो कारकों का दृष्टान्त भी ऐसा ही है । क्योंकि जैसे आधार आधेय दो कारक 'वृक्षे शाखा' (वृक्ष में शाखा) यहाँ पर अभिन्न-एकात्मक पदार्थ में होते हैं, वैसे 'स्थाल्यां दधि' (बटलोई में दही) यहाँ पर भिन्न-अनेक पदार्थों में भी होते हैं । अर्थात्‌ 'वृक्षे शाखा' यहाँ पर जो आधार आधेय है वह अभिन्न पदार्थ में है, इसलिये सपक्ष है । परन्तु 'स्थाल्यां दधि' यहाँ पर जो आधार आधेय है वह भिन्न दो पदार्थों में है इसलिये वह विपक्ष है । इसलिये दो कारकों का दृष्टान्त व्यभिचारी है ।
यदि कोई यह कहे कि यह दृष्टान्त व्यभिचारी भले ही हो, परन्तु इससे अपने पक्ष की सिद्धि भी किसी तो प्रकार हो ही जाती है । यह कहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि व्यभिचारी दृष्टान्त जैसे दूसरे पक्ष का शत्रु है वैसे अपने अपने पक्ष का भी तो स्वयं शत्रु है अर्थात्‌ व्यभिचारी दृष्टान्त जैसे सपक्ष में रहकर साध्य की सिद्धि कराता है वैसे विपक्ष में रहकर वह साध्य विरुद्ध भी तो हो जाता है । इसलिये यह दृष्टांत दृष्टांताभास है । यहाँ पर सत्‌ और परिणाम में देश के अंश होने से अंशपना सिद्ध किया जाता है और उनका आधार उनसे भिन्न पदार्थ सिद्ध किया जाता है (यह शंकाकार का मत है) यदि उन दोनों का कोई स्वामी-आराधारभूत पदार्थ हो तब तो आधार-आधेयभाव उनमें बन जाय, परन्तु सत्-परिणाम से अतिरिक्त उनका कोई स्वामी हो नहीं है तो फिर ये दोनों किसके अंश कहलावेंगे ? वे दोनों तो अंश स्वरूप ही माने जा चुके हैं, इसलिये कारकद्वय का दृष्टांत ठीक नहीं है ।