+ वाच्य वाचक भी दृष्टान्ताभास है -
वागर्थद्वयमिति वा दृष्टान्तो न स्वसाधनायालम्‌ ।
घट इति वर्णद्-द्वैतात्‌ कम्वुग्रीवादिमानिहास्त्यपरः ॥394॥
यदि वा निस्सारतया वागेवार्थ: समस्यते सिद्धर्यै ।
न तथापीष्टसिद्धिः शब्दवदर्थस्याप्यनित्यत्वात्‌ ॥395॥
अन्वयार्थ : वचन और पदार्थ अर्थात्‌ वाच्य वाचक द्वैत का दृष्टांत भी अपनी सिद्धि कराने में समर्थ नहीं है । क्योंकि घट-घकार और टकार इन दो वर्णों से कम्वुग्रीवादिवाला घट पदार्थ दूसरा ही है । जिस कम्वु (शंख) ग्रीवावाले घट में जल रक्‍खा जाता है वह