न परं स्यात्परायत्ता सतो वैभाविकी क्रिया ।
यस्मात्सतोऽसती शक्ति: कर्तुमन्यैर्न शक्‍यते ॥62॥
अन्वयार्थ : [सत: वैभाविकी क्रिया] द्रव्य की वैभाविकी क्रिया [पर परायत्ता न स्यात्‌] केवल पराधीन नहीं होती है [यरमात्] क्योंकि [सतः] द्रव्य की [असती शाक्ति] अविधमान शक्ति [कर्तुमन्यैर्न शक्‍यते] दूसरों के द्वारा उत्पन्न नहीं की जा सकती है ।