+ शंका - क्या वैभाविकी शक्ति दो के संयोग में ही होती है ? -
ननु वैभाविकी शाक्तिस्तथा स्यादन्ययोगतः ।
परयोगाद्विना किं न स्याद्वास्ति तथान्यथा ॥79॥
अन्वयार्थ : [ननु] शंकाकार का कहना है कि यदि [वैभाविकी शक्ति:] वैभाविकी शाक्ति [अन्ययोगत] जीव और पुद्गल में परस्पर के योग से [तथा स्यात्‌] बन्ध कराने में समर्थ होती है तो [पर योगात्‌ विना किं तथा न स्यात्] क्या परयोग के बिना वह बन्ध कराने में समर्थ नहिं होती हैं ? [वा] अथवा [अन्यथा अस्ति] अन्यथा होती है ।