सत्यं नित्या तथा शक्ति: शक्तित्वाच्छुद्धशक्तिवत् ।
अथान्यथा सतो नाशः शक्तीनां नाशतः क्रमात ॥80॥
अन्वयार्थ : [सत्यं] तुम्हारा कहना ठीक है परन्तु [शक्तित्वात्] शक्ति होने के कारण [शुद्धशक्तिवत्‌] स्वाभाविकी शक्ति की तरह [शक्ति:] वैभाविकी शाक्ति भी [तथानित्या] वैसी ही नित्य रहती है कारण [अथ अन्यथा] यदि ऐसा नहीं हो (शक्ति को अनित्य मानें) तो [क्रमात्‌] क्रम-क्रम से [शक्तिनां नाशत] शक्तियों (गुणों) के नाश से [सतः नाश] सत्‌ (द्रव्य) के नाश का प्रसंग आवेगा ।