लेश्या षडेव विख्याता भावा औदयिका: स्मृता: ।
यस्माद्योगकषायाभ्यां द्वाभ्यामेवोदयोद्भवा: ॥1141॥
अन्वयार्थ :
आगम में छह लेश्याएँ प्रसिद्ध हैं । वे सब औदयिक मानी गयीं हैं क्योंकि योग और कषाय इन दोनों के उदय से वे उत्पन्न होती हैं ॥११४१॥