आपदा मूर्च्छितो वारिचुलुकेनापि जीवति ।
अंभ:कुंभसहस्त्राणां गतजीव: करोति किम् ॥222॥
अन्वयार्थ : जो आपदा से मूर्च्छित हुआ है, वह तो चुल्लुभर पानी के छिड़कने से भी जीवंत (जागृत) हो जाता है; परन्तु जो गतजीव है (मृत्यु को प्राप्त) उसे तो पानी के हजारों घड़े भी क्या कर सकते हैं ? (जिस जीव में मुमुक्षुता है, वह तो थोड़े से ही उपदेश से जागृत हो जाता है, परन्तु जिसमें मुमुक्षुपना नहीं है, उसे तो हजारों शास्त्रों का भी उपदेश निरर्थक है ।)