
ये याता यांति यास्यंति निर्वृत्तिं पुरुषोत्तमाः ।
मानसं निश्चलं कृत्वः स्वे चिद्रूपे न संशयः ॥19॥
जो श्रेष्ठ नर शिव गए, जा रहे जाएंगे संशय नहीं ।
निज शुद्ध चिद्रूप में अचल, मन कर यही बस हेतु ही ॥६.१९॥
अन्वयार्थ : जो पुरुषोत्तम-महात्मा मोक्ष गये या जा रहे हैं और जावेंगे इसमें कोई संदेह नहीं कि उन्होंने अपना मन शुद्धचिद्रूप के ध्यान में निश्चलरूप से लगाया, लगाते हैं और लगावेंगे ।