+ व्यवहार के आश्रय का अन्य कारण -
शुद्धचिद्रूपसद्ध्यानपर्वतादवरोहणं ।
यदान्यकृतये कुर्यात्तदा तस्यावलंबनं ॥15॥
कुछ अन्य कारण वश यदि, चिद्रूप ध्यान गिरी गिरे ।
तो पुन: उस व्यवहार को, अवलम्ब निज ध्याता बने ॥७.१५॥
अन्वयार्थ : यदि कदाचित्‌ किसी अन्य प्रयोजन के लिये शुद्धचिद्रूप के निश्चल ध्यानरूपी पर्वत से उतरना हो जाय, ध्यान करना छोड़ना पड़े तो उस समय भी व्यवहारनय का अवलंबन रखे ।