कारणेन विना कार्यं न स्यात्तेन विना नयं ।
व्यवहारं कदोत्पत्तिर्निश्चयस्य न जायते ॥17॥
जो प्राप्त हैं पा रहे पाएंगे विभव शिव सौख्यमय ।
वे पूर्व में व्यवहार आलम्बन, पुन: निश्चय सतत ॥७.१७॥