
जचंदछाबडा :
यहाँ मुनिप्रवर ऐसा सम्बोधन है सो प्रधानरूप से मुनियोंको उपदेश है । जो मुनिपद लेकर मुनियों से प्रधान कहलावे और शुद्धात्मरूप निश्चयचारित्र के सन्मुख न हो, उसको कहते हैं कि बाह्य द्रव्यलिंग तो बहुतवार धारणकर चार गतियों में ही भ्रमण किया, देव भी हुआ तो वहाँ से चयकर इसप्रकार के मलिन गर्भवास में आया, वहाँ भी बहुतवार रहा ॥१७॥ |