
जचंदछाबडा :
स्त्रीकथा, भोजनकथा, देशकथा और राजकथा इन चार विकथाओंमें आसक्त होकर वहाँ परिणाम को लगाया तथा जाति आदि साठ मदों से उन्मत्त हुआ, ऐसी अशुभ भावना ही का प्रयोजन धारण कर अनेकबार नीच देवपने को प्राप्त हुआ, वहाँ मानसिक दुःख पाया । यहाँ यह विशेष जानने योग्य हैं कि विकथादिक से तो नीच देव भी नहीं होता है, परन्तु यहाँ मुनि को उपदेश है, वह मुनिपद धारणकर कुछ तपश्चरणादिक भी करे और वेषमें विकथादिक में रक्त हो तब नीच देव होता है, इसप्रकार जानना चाहिये ॥१६॥ |