
जचंदछाबडा :
अपने कोई दोष लगा हो और निष्कपट होकर गुरु को कहे तो वह दोष निवृत्त हो जावे । यदि आप शल्यवान रहे तो मुनिपद में यह बड़ा दोष है, इसलिये अपना दोष छिपाना नहीं, जैसा हो वैसा सरलबुद्धि से गुरुओंके पास कहे तब दोष मिटे यह उपदेश है । काल के निमित्त से मुनिपद से भ्रष्ट भये, पीछे गुरुओं के पास प्रायश्चित्त नहीं लिया, तब विपरीत होकर अग सम्प्रदाय बना लिए, ऐसे विपर्यय हुआ ॥१०६॥ |