
जचंदछाबडा :
यहाँ और तो पूर्वोक्त प्रकार जानना, परन्तु 'सकल' विशेषण का यह आशय है कि -- मोक्षमार्ग की प्रवृत्ति करने के जो उपदेश हैं वह वचन के प्रवर्ते बिना नहीं होते हैं और वचनकी प्रवृत्ति शरीर बिना नहीं होती है, इसलिये अरहंत का आयु-कर्म के उदय से शरीर सहित अवस्थान रहता है और सुस्वर आदि नाम-कर्म के उदय से वचन की प्रवृत्ति होती है । इस तरह अनेक जीवों का कल्याण करनेवाला उपदेश होता रहता है । अन्यमतियों के ऐसा अवस्थान (ऐसी स्थिति) परमात्मा के संभव नहीं है, इसलिये उपदेश की प्रवृत्ति नहीं बनती है, तब मोक्ष-मार्ग का उपदेश भी नहीं बनता है, इसप्रकार जानना चाहिये ॥१५२॥ |