
जचंदछाबडा :
पुरुष के चार प्रयोजन प्रधान हैं -- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष । अन्य भी जो कुछ मंत्र-साधनादिक व्यापार हैं, वे आत्मा के शुद्ध चैतन्य-परिणाम-स्वरूप भाव में स्थित हैं । शुद्ध-भाव से सब सिद्धि है, इसप्रकार संक्षेप से कहना जानो, अधिक क्या कहें ? ॥१६४॥ |