
जचंदछाबडा :
जिनमत में ऐसा उपदेश है कि जो हिंसादिक पापों से विरक्त हो, विषय-कषायों से आसक्त न हो और परमात्मा का स्वरूप जानकर उसकी भावना सहित जीव होता है वह मोक्ष को प्राप्त कर सकता है, इसलिये जिनमत की मुद्रा से जो पराङ्मुख है उसको मोक्ष कैसे हो ? वह तो संसार में ही भ्रमण करता है । यहाँ रुद्र का विशेषण दिया है उसका ऐसा भी आशय है कि रुद्र ग्यारह होते हैं, ये विषय--कषायों में आसक्त होकर जिनमुद्रा में भ्रष्ट होते हैं, इनको मोक्ष नहीं होता है, इनकी कथा पुराणों से जानना ॥४६॥ |