
जचंदछाबडा :
कोई ऐसी आशंका करते हैं कि -- पर-द्रव्य में राग करने से क्या होता है ? पर-द्रव्य है वह पर है ही, अपने राग जिस काल हुआ उस काल है, पीछे मिट जाता है, उसको उपदेश दिया है कि -- पर-द्रव्य से राग करने पर पर-द्रव्य अपने साथ लगता है, यह प्रसिद्ध है, और अपने राग का संस्कार दृढ़ होता है तब परलोक तक भी चला जाता है यह तो युक्ति-सिद्ध है और जिनागम में राग से कर्म का बंध कहा है, इसका उदय अन्य जन्म का कारण है, इस प्रकार पर-द्रव्य में राग से संसार होता है, इसलिये योगीश्वर मुनि पर-द्रव्य से राग छोड़कर आत्मा में निरंतर भावना रखते हैं ॥७१॥ |