+ दोष सहित आहार का निषेध -
उद्देसिय कीदयडं अण्णादं संकिदं अभिहडं च ।
सुत्तप्पडिकूडाणि य पडिसिद्धं तं विवज्जंति ॥814॥
अन्वयार्थ : उद्देश अर्थात् दोष सहित, क्रीत, अज्ञात, शंकित, अभिघट दोष सहित, आगम के विरूद्ध आहार निषिद्ध है, ऐसा आहार मुनि छोड़ देते हैं ।