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ग्रहण करने योग्य आहार
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जं सुद्धमसंसत्तं खज्जं भोज्जं च लेज्ज पेज्जं वा ।
गिहंण्ति मुणी भिक्खं सुत्तेण अणिंदयं जं तु ॥826॥
अन्वयार्थ :
जो शुद्ध है, जीवों से सम्बद्ध नहीं है, और जो आगम से र्विजत नहीं है ऐसे खाद्य, भोज्य, लेह्य और पेय को मुनि आहार में लेते हैं ।