+ ज्ञान भावना से सम्पन्न साधु -
आगमकदविण्णाणा अट्ठंगविदू य बुद्धिसंपण्णा ।
अंगाणि दस य दोण्णि य चोद्दस य धरंति पुव्वाइं ॥833॥
अन्वयार्थ : आगम के ज्ञानी, अष्ठांग निमित्त के वेत्ता, बुद्धि ऋद्धि से सम्पन्न वे मुनि बारह अंग और चौदह पूर्वों को धारण करते हैं ।