
छाबडा :
सातावेदनीय, शुभ-आयु, उच्च-गोत्र और शुभ-नाम ये चार प्रकृतियाँ तो पुण्यरूप हैं बाकी चार घातिया कर्म, असातावेदनीय, नरकायु, नीचगोत्र और अशुभनाम ये चार प्रकृतियाँ पापरूप हैं । उनके कारण आस्रव भी दो प्रकार के हैं । मंद-कषायरूप परिणाम तो पुण्यास्रव हैं और तीव्र-कषायरूप परिणाम पापास्रव हैं । अब मंद-तीव्र-कषाय को प्रगट दृष्टान्त पूर्वक कहते हैं - |