
छाबडा :
कर्मबन्ध के कारण आस्रव है। वे मिथ्यात्व, अविरत, प्रमाद, कषाय और योग के भेद से पाँच प्रकार के हैं । उनमें स्थिति, अनुभागरूप बन्ध के कारण मिथ्यात्वादिक चार ही है सो ये मोह के उदय से होते हैं और जो योग हें वे समय-मात्र बन्ध को करते हैं, कुछ भी स्थिति अनुभाग को नहीं करते हैं इसलिये बन्ध के कारण में प्रधान नहीं हैं । अब पुण्य-पाप के भेद से आस्रव को दो प्रकार का कहते हैं - |