+ लोक नित्य है -
अण्णोण्ण-पवेसेण य दव्वाणं अच्छणं हवे लोओ
दव्वाणं णिच्चत्तो लोयस्स वि मुणह णिच्चत्तं ॥116॥
अन्वयार्थ : द्रव्‍यों की परस्‍पर में एक-क्षेत्रावगाहरूप स्थिति को लोक कहते हैं । द्रव्‍य नित्‍य है, अत: लोक को भी नित्‍य जानो ।

  छाबडा