पं-जयचंदजी-छाबडा
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लोक नित्य है
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अण्णोण्ण-पवेसेण य दव्वाणं अच्छणं हवे लोओ
दव्वाणं णिच्चत्तो लोयस्स वि मुणह णिच्चत्तं ॥116॥
अन्वयार्थ :
द्रव्यों की परस्पर में एक-क्षेत्रावगाहरूप स्थिति को लोक कहते हैं । द्रव्य नित्य है, अत: लोक को भी नित्य जानो ।
छाबडा