पं-जयचंदजी-छाबडा
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लोक की परिभाषा
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दंसंति जत्थ अत्था जीवादीया स भण्णदे लोओ
तस्स सिहरम्मि सिद्धा अंत-विहीणा विरायंते ॥121॥
अन्वयार्थ :
जहाँ पर जीव आदि पदार्थ देखे जाते हैं, उसे लोक कहते हैं । उसके शिखर पर अनन्त सिद्ध परमेष्ठी विराजमान हैं ।
छाबडा