पं-जयचंदजी-छाबडा
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जीव-द्रव्य
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एइंदिएहिं भरिदो पंच-पयारेहिं सव्वदो लोओ
तस-णाडीए वि तसा णबाहिरा होंति सव्वत्थ ॥122॥
अन्वयार्थ :
यह लोक पाँच प्रकार के ऐन्द्रिय जीवों से सर्वत्र भरा हुआ है । किन्तु त्रस-जीव त्रसनाली में ही होते हैं, उसके बाहर सर्वत्र नहीं होते ।
छाबडा