+ जीव-द्रव्य -
एइंदिएहिं भरिदो पंच-पयारेहिं सव्वदो लोओ
तस-णाडीए वि तसा णबाहिरा होंति सव्वत्थ ॥122॥
अन्वयार्थ : यह लोक पाँच प्रकार के ऐन्द्रिय जीवों से सर्वत्र भरा हुआ है । किन्‍तु त्रस-जीव त्रसनाली में ही होते हैं, उसके बाहर सर्वत्र नहीं होते ।

  छाबडा