
ण य जेसिं पडिखलणं पुढवी -तोएहिं अग्गि-वाएहिं
ते जाण सुहुम-काया इयरा पुण थूल-काया य ॥127॥
अन्वयार्थ : [जत्थ एक्को चंकमइ] जहाँ एक साधारण निगोदिया जीव उत्पन्न होता है [तत्थ णंताणं चंकमणं] वहाँ उसके साथ ही अनन्तानन्त जीव उत्पन्न होते हैं [जत्थेक्कु जीवो मरइ] और जहाँ एक निगोदिया जीव मरता है [तत्थ दु मरणं हवे अणंताणं] वहाँ उसके साथ ही अनन्तानन्त समान आयुवाले मरते हैं ।
छाबडा