+ प्रत्येक और त्रस जीव का स्वरूप -
पत्तेया वि य दुविहा णिगोद-सहिदा तहेव रहिया य
दुविहाहािें त तसावियवि-ति-चउरक्खातहवे पचं क्खा ॥128॥
अन्वयार्थ : पत्तेया वि य दुविहा णिगोद-सहिदा तहेव रहिया य
दुविहाहािें त तसावियवि-ति-चउरक्खातहवे पचं क्खा ॥१२८॥

  छाबडा