पं-जयचंदजी-छाबडा
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प्रत्येक और त्रस जीव का स्वरूप
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पत्तेया वि य दुविहा णिगोद-सहिदा तहेव रहिया य
दुविहाहािें त तसावियवि-ति-चउरक्खातहवे पचं क्खा ॥128॥
अन्वयार्थ :
पत्तेया वि य दुविहा णिगोद-सहिदा तहेव रहिया य
दुविहाहािें त तसावियवि-ति-चउरक्खातहवे पचं क्खा ॥१२८॥
छाबडा