
मण-वयण-काय-इंदिय-णिस्सासुस्सास-आउ-उदयाणं
जेसिं जोए जम्मदि मरदि विओगम्मि ते वि दह पाणा ॥139॥
अन्वयार्थ : [मण-वयण-काय-इंदिय-णिस्सासुस्सास-आउ-उदयाणं] जो मन, वचन, काय, इन्द्रिय, श्वासोच्छवास और आयु [जेसिं जोए जम्मदि] इनके संयोग से उत्पन्न हो जीए और [मरदि विओगम्मि] वियोग से मरे, [ते वि दह पाणा] वे वे दश प्राण होते हैं ।
छाबडा