लद्धियपुण्णे पुण्णं पज्जत्ती एयक्ख-वियल-सण्णीणं
चदुपण छक्कं क मसो पज्जत्तीए वियाणेह ॥138॥
अन्वयार्थ : [एयक्ख-वियल-सण्णीणं] एकेन्द्रिय, विकलत्रय तथा संज्ञी जीव के [कमसो] क्रम से [चदुपण छक्कं] चार, पाँच, छह [पज्जत्तीए वियाणेह] पर्याप्तियाँ जानो; [लद्धियपुण्णे पुण्णं] लब्ध्यपर्याप्तक अपर्याप्तक है, इसके पर्याप्तियाँ नहीं होती ।

  छाबडा