
दुविहाणमपुण्णाणं इगिवितिचउरक्ख अंतिम-दुगाणं
तिय चउ पण छह सत्त य कमेण पाणा मुणेयव्वा ॥141॥
अन्वयार्थ : [दुविहाणमपुण्णाणं इगिवितिचउरक्ख अंतिमद्गाणं] दो प्रकार के अपर्याप्त जो एकेन्द्रिय, द्वीन्द्रिय, त्रीन्द्रिय, चतुरिन्द्रिय असैनी तथा सैनी पंचेन्द्रियों के [तिय चउ पण छह सत्त य कमेण पाणा मुणेयव्वा] तीन, चार, पाँच, छह, सात ऐसे अनुक्रम से प्राण जानना चाहिये ।
छाबडा