सत्तम-णारयहिंतो असंख-गुणिदा हवंति णेरइया
जाव य पढमं णरयं बहु-दुक्खा होंति हेट्ठिट्ठा ॥159॥
अन्वयार्थ : [सत्तमणारयहितो] सातवें नरक से लेकर ऊपर [जावय पढमं णरयं] पहिले नरक तक जीव [असंखगुणिदा हवंति] असंख्यात-असंख्यात गुणे हैं [णेरइया] पहिले नरक से लेकर [हेडिट्ठा] नीचे-नीचे [बहुदुक्खा होंति] बहुत दुःख हैं ।

  छाबडा