
कप्प-सुरा भावणया विंतर-देवा तहेव जोइसिया
बे हुंति असंख-गुणा संख-गुणा होंति जोइसिया ॥160॥
अन्वयार्थ : [कप्पसुरा भावणया विंतरदेवा] कल्पवासी देवों से भवनवासी देव व्यन्तरदेव [बे असंखगुणा होंति] ये दो राशि तो असंख्यातगुणी है [जोइसिया संखगुणा होंति] और ज्योतिषी देव व्यन्तरों से संख्यातगुणे हैं ।
छाबडा