बावीस-सत्त-सहसा पुढवी-तोयाण आउसं होदि
अग्गीणं तिण्णि दिणा तिण्णि सहस्साणि वाऊणं ॥162
अन्वयार्थ : [पुढवीतोयाण आउसं ] पृथ्वीकायिक और अप्कायिक जीवों की उत्कृष्ट आयु क्रम से [बावीस सत्तसहसा] बाईस हजार वर्ष और सात हजार वर्ष की [होदि] है [अग्गीणं तिण्णि दिणा] अग्निकायिक जीवों की उत्कृष्ट आयु तीन दिन की है [तिण्णि सहस्साणि वाऊणं] वायुकायिक जीवों की उत्कृष्ट आयु तीन हजार वर्ष की है ।

  छाबडा