+ जीवों की आयु -
पत्तेयाणं आऊ वास-सहस्साणि दह हवे परमं
अंतो मुहुत्तमाऊ साहारण-सव्व-सुहुमाणं ॥161॥
अन्वयार्थ : [पत्तेयाणं] प्रत्येक वनस्पति की [परमं] उत्कृष्ट [आऊ] आयु [दह] दस [वाससहस्साणि] हजार वर्ष की [हवे] है [साहारणसव्वसुहुमाणं] साधारण नित्य, इतरनिगोद सूक्ष्म बादर तथा सब ही सूक्ष्म पृथ्वी, अप, तेज, वातकायिक जीवों की उत्कृष्ट [आऊ] आयु [अंतोमुहुत्] अंतर्मुहूर्त की है ।

  छाबडा