
अंगुल-असंख-भागो एयक्ख -चउक्ख-देह-परिमाणं
जोयण -सहस्स-महियं पउमं उक्कस्सयं जाण ॥166॥
अन्वयार्थ : [एयक्खचउक्कदेहपरिमाणं] एकेन्द्रिय चतुष्क जीवों की अवगाहना [उक्कसयं] जघन्य तथा उत्कृष्ट [अंगुलअसंखभागो] घन-अंगुल के असंख्यातवें भाग [जाण] जानो । [जोयणसहस्सम हियं पउमं] प्रत्येक वनस्पति-काय में उत्कृष्ट अवगाहना युक्त कमल है उसकी अवगाहना कुछ अधिक हजार योजन है ।
छाबडा