
पंच-सया धणु-छेहा सत्तम-णरए हवंति णारइया
तत्तो उस्सेहेण य अद्धद्धा होंति उवरुवरिं ॥168॥
अन्वयार्थ : [सत्तमणरए] सातवें नरक में [णारइया] नारकी जीवों का शरीर [पंचसयाधणुछेहा] पाँच सौ धनुष ऊँचा [हवंति] है [ततो उस्सेहेण य उवरुवरि अद्वद्धा होंति] उसके ऊपर शरीर की ऊँचाई आधी आधी है ।
छाबडा