
तेसु अतीदा णंता अणंत-गुणिदा य भावि-पज्जाया
एक्को वि वट्टमाणे एत्तिय-मेत्तो वि सो कालो ॥221॥
अन्वयार्थ : [तेसु अतीदा पंता] उन द्रव्यों की पर्यायों में अतीत पर्याय अनन्त हैं [य भाविपजाया अणंतगुणिदा] और अनागत पर्यायें उनसे अनन्तगुणी हैं [एको वि घट्टमाणो] वर्तमान पर्याय एक ही है [एत्तियमिचो वि सो कालो] सो जितनी पर्यायें हैं उतना ही व्यवहारकाल है ।
छाबडा