जीवाण पुग्गलाणं जे सुहुमा बादरा य पज्जाया
तीदाणागद-भूदा सो ववहारो हवे कालो ॥220॥
अन्वयार्थ : [जीवाण पुग्गलाणं] जीव द्रव्य और पुद्गल-द्रव्य के [सुहुमा बादरा य पजाया] सूक्ष्म तथा बादर पर्याय हैं [जे] वे [तीदाणागदभूदा] अतीत हो चुके हैं, अनागत आगामी होएंगे, भूत-वर्तमान हैं [सो ववहारो कालो हवे] सो ऐसा व्यवहार काल होता है ।

  छाबडा