
सव्वं जाणदि जम्हा सव्व-गयं तं पि वुच्चदे तम्हा
ण य पुण विसरदि णाणं जीवं चइऊण अण्णत्थ ॥255॥
अन्वयार्थ : [जम्हा सव्वं जाणदि] क्योंकि ज्ञान सब को जानता है [तम्हा तं पि सव्यगयं वुच्चदे] इसलिये ज्ञान को सर्वगत भी कहते हैं [पुण] और [णाणं जीवं चइऊण अण्णत्थ] ज्ञान जीव को छोड़कर अन्य ज्ञेय पदार्थों में [ण य विसरदि] नहीं जाता है ।
छाबडा