+ पात्रों का भेद -
पात्रं त्रिभेदमुक्तं संयोगो मोक्षकारणगुणानाम् ।
अविरतसम्यग्दृष्टि: विरताविरतश्च सकलविरतश्च ॥171॥
हैं पात्र तीन प्रकार शिव, हेतु गुणों संयुक्त ही ।
अविरत सुदृष्टि देशविरति, सकल विरति जिन कही ॥१७१॥
अन्वयार्थ : [मोक्षकारणगुणानाम्] मोक्ष के कारणरूप गुणों के अर्थात् सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्ररूप गुणों के [संयोग:] संयोगवाला [पात्रं] पात्र [अविरतसम्यग्दृष्टि:] व्रतरहित सम्यग्दृष्टि [च] तथा [विरताविरत:] देशव्रती [च] और [सकल-विरत:] महाव्रती [त्रिभेद] तीन भेदरूप [उक्तम्] कहा गया है ।
Meaning : The recipients are of three classes, according to their respective possession of qualities leading to Moksha. They are true believers without yows, with partial vows, and with full vows.

  टोडरमल