
गृहमागताय गुणिने मधुकरवृत्या परानपीडयते ।
वितरति यो नातिथये स कथं न हि लोभवान् भवति ॥173॥
नहिं अन्य पीड़ें मधुकरी, वृत्ति सहित गुणवान भी ।
घर आए अतिथि को नहीं दे, लोभयुत कैसे नहीं? ॥१७३॥
अन्वयार्थ : [य:] जो गृहस्थ [गृहमागताय] घर पर आये हुए [गुणिने] संयमादि गुणों से युक्त और [मधुकरवृत्या] भ्रमर समान वृत्ति से [परान्] दूसरों को [अपीडयते] पीड़ा न देनेवाले [अतिथये] अतिथि साधु को [न वितरति] भोजनादि नहीं देता, [स:] [वह [लोभवान्] लोभी [कथं] कैसे [न हि भवति] न हो]?
Meaning : Why should one be not called greedy if he does not.offer to a saint who visits his home, who is well qualified and who, acting like a honey-bee, accepts gifts without causing any injury to others.
टोडरमल