
यो हि कषायाविष्ट: कुम्भकजलधूमकेतुविषशस्त्रै: ।
व्यपरोपयति प्राणान् तस्य स्यात्सत्यमात्मवध: ॥178॥
हो जो कषायाविष्ट श्वास निरोध जल अग्नि जहर ।
शस्त्रादि से निज प्राण घाते, आत्मघात उसे सतत ॥१७८॥
अन्वयार्थ : [हि] निश्चय से [कषायाविष्ट:] क्रोधादि कषायों से घिरा हुआ [य:] जो पुरुष [कुम्भकजलधूमकेतुविषशस्त्रै:] श्वासनिरोध, जल, अग्नि, विष, शस्त्रादि से अपने [प्राणान्] प्राणों को [व्यपरोपयति] पृथक् करता है, [तस्य] उसे [आत्मवध:] आत्मघात [सत्यम्] वास्तव में [स्यात्] होता है ।
Meaning : He who, actuated by passions, puts an end to his life by stopping breath, or by water, fire, poison, or weapons, is certainly guilty of suicide.
टोडरमल