+ सल्लेखना आत्मघात नहीं -
मरणेऽवश्यं भाविनि कषायसल्लेखनातनूकरणमात्रे ।
रागादिमन्तरेण व्याप्रियमाणस्य नात्मघातोऽस्ति ॥177॥
अवश्य होते मरण में, नित कषायों के कृश करण ।
में लगे को रागादि बिन, नहिं आत्मघात है सल्लेखन ॥१७७॥
अन्वयार्थ : [अवश्यं] अवश्य [भाविनि] होनेवाले [मरणे 'सति'] मरण होने पर [कषायसल्लेखनातनूकरणमात्रे] कषाय सल्लेखना के कृश करने मात्र के व्यापार में [व्याप्रियमाणस्य] प्रवर्तमान पुरुष को [रागादिमन्तरेण] रागादिभावों के अभाव में [आत्मघात:] आत्मघात [नास्ति] नहीं है ।
Meaning : On account of the absence of any emotion, there is no suicide by one acting in this manner, on the certain aproach of death, because by the observance of Sallekhana, the passions are attenuated

  टोडरमल