+ परिग्रहपरिमाण व्रत के पाँच अतिचार -
वास्तुक्षेत्राष्टापदहिरण्यधनधान्यदासदासीनाम् ।
कुप्यस्य भेदयोरपि परिमाणातिक्रिया: पञ्च ॥187॥
है खेत घर सोना रु चाँदी, धान्य धन दास दासिआँ ।
वस्त्रादि की सीमा उलंघन, दोष संग सीमा कहा ॥१८७॥
अन्वयार्थ : वास्तुक्षेत्राष्टापदहिरण्यधनधान्यदासदासीनाम् ।
कुप्यस्य भेदयोरपि परिमाणातिक्रिया: पञ्च ॥१८७॥
Meaning : Exceeding the limits regarding house and land, gold, and silver, cattle and corn, man and woman servant, clothes and utensils, are 5 (breaches of the vow of limited possessions).

  टोडरमल